दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा किसने और कैसे शुरू की?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली हिंसा, अराजकता और भय की स्थिति में फंसी हुई है। 23 फरवरी, 2020 को शुरू हुए दिल्ली के दंगे अभी भी जारी हैं।

नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, दंगों के मुख्य क्षेत्रों के आसपास, मुख्य रूप से दिल्ली के उत्तर-पूर्व हिस्से में पुलिस को देखते ही गोली मरने की मंजूरी दी गई है और दिल्ली की सीमाओं को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

पिछले ढाई महीने से दिल्ली भर के नागरिक सीएए और एनआरसी कानूनों के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिन्हें मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार ने मंजूरी दी थी। भारत के अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ इन बिलों की भेदभावपूर्ण प्रकृति के कारण कई लोग इसके विरोध में सामने आए हैं और सरकार से इसे वापस लेने के लिए कहा है।

हालांकि, अब तक, इनमें से अधिकांश विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे। हालांकि, अब स्थिति बहुत ख़राब है जिसकी वजह से लगभग 35 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए हैं।

लेकिन वास्तव में ये दंगे कहाँ से शुरू हुए थे? यह पूरी बात किसने शुरू की?

दंगा किसने शुरू किया?

शनिवार की रात:

फ़र्स्टपोस्ट ने 23 फरवरी को बताया कि कैसे 500 से अधिक लोग, जिनमें से ज्यादातर महिलाएं थीं, दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास एक सीएए विरोधी प्रदर्शन पर जाने की योजना बना रही थीं।

इसके परिणामस्वरूप दिल्ली मेट्रो प्राधिकरणों ने मेट्रो स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार को बंद कर दिया और साथ ही उस विशेष स्टेशन पर ट्रेनों को रोकने की अनुमति नहीं दी।

डीएमआरसी ने इसके बारे में ट्वीट भी किया और कहा कि, “जाफराबाद में प्रवेश और निकास को बंद कर दिया गया है। ट्रेनें इस स्टेशन पर नहीं रुकेंगी।”

लाइवमिंट की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा इसलिए था क्योंकि शनिवार रात से ही कई प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशन के बाहर सड़क पर जाम लगा रहे थे।

प्रदर्शनकारी रोड नंबर 66 पर कब्जा कर रहे थे जो सीलमपुर को मौजपुर और यमुना विहार से जोड़ता है, जिसके बीच में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन था।

रविवार:

रविवार को सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध जारी रखा, कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि मेट्रो स्टेशन से लगभग 1 किमी दूर कैरिजवे के एक तरफ सुबह से उनके द्वारा मार्ग अवरुद्ध किया गया था।

यह स्पष्ट नहीं है कि कब सीएए समर्थक समूह इकट्ठे हुए और वास्तव में सड़कों और क्षेत्रों को साफ करने के लिए अपना विरोध शुरू कर दिया। हालांकि कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी के कपिल मिश्रा ने सीएए के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए मौजपुर चौक (जफराबाद के सामने) में लगभग 200-300 लोगों के साथ मिल गए।

वह रविवार को लगभग 2.30 या 3 बजे आये, जो लगभग उसी समय था जब सीए-विरोधी प्रदर्शनकारियों का एक समूह भी उसी क्षेत्र में पहुंचा था।

द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों समूह नारेबाजी कर रहे थे और जाहिर तौर पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ लोगों को जाफ़राबाद की तरफ से बाबरपुर की तरफ भागते देखा गया, जहाँ कथित तौर पर सीएए समर्थक इकट्ठा थे। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वे सीएए-समर्थक, सीएए-विरोधी थे या वास्तव में ये लोग कौन थे।

स्थान पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा है कि दोनों पक्ष एक दूसरे पर पथराव कर रहे थे, केवल सुदृढीकरण आने के बाद रुक गए और उन्होंने दोनों पक्षों को एक दूसरे से दूर रखने के लिए मानव श्रृंखला बनाई।

द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी यही बात दोहराई गई कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस पूरी घटना को वास्तव में किसने शुरू किया था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (पूर्वी सीमा) आलोक कुमार ने कहा है कि, “हम घटना के पीछे के लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।”


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इसमें कपिल मिश्रा का क्या हाथ था?

यह देखते हुए कि इन दंगों को शुरू करने के लिए अभी तक किसी पर आरोप नहीं लगाया गया है, मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ है कि कैसे कुछ रिपोर्ट कह रही हैं कि यह पूरी बात कपिल मिश्रा के नेतृत्व में हुई थी।

यह कुछ चीजें हैं जो हम उनके सीएए-समर्थक प्रदर्शन में शामिल होने के बारे में जानते हैं:

# 1 इंडियन एक्सप्रेस, द प्रिंट, द हिंदू और कई अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि कपिल मिश्रा ने मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन पर एक सीएए-समर्थक रैली का नेतृत्व किया जो किलगभग 2 किलोमीटर दूर है जहां से सीएए विरोधी प्रदर्शन चल रहा था।

# 2 इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें नारे लगाते हुए सुना जा सकता है:

“भारत माता की जय”

“जय श्री राम”

इसका सीएए समर्थक कथित रूप से “देश के गद्दारों को, गोली मारो सैलून को” जैसे नारों के साथ जवाब दे रहे थे।

रैली में उनके बोलने के वीडियो भी थे जहां उन्होंने कहा था कि, “वे (प्रदर्शनकारी) दिल्ली में परेशानी पैदा करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने सड़कें बंद कर दी हैं। इसीलिए उन्होंने यहां दंगे जैसी स्थिति पैदा कर दी है। हमने कोई पथराव नहीं किया है। जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में हैं, हम शांति से इस क्षेत्र को छोड़ रहे हैं। उसके बाद यदि सड़कें खाली नहीं होती हैं तो हम आपकी(पुलिस) नहीं सुनेंगे।”

# 3 कहा जाता है कि रैली से बाहर निकलते ही दंगे भड़क गए थे। और फिर उन्होंने ट्वीट किया कि, “हमने दिल्ली पुलिस को सड़क को साफ करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। जाफराबाद और चांदबाग (जहां एक और धरना-प्रदर्शन चल रहा है) सड़क को साफ किया जाए।”

ये ऐसे तथ्य हैं जो सामने आए हैं पर मेरे अनुसार कुछ चीजें इसके साथ सही नहीं बैठती।

एक यह है कि हम यह कहकर मिश्रा को अधिक महत्व दे रहे हैं कि उनकी वजह से हिंसा हुई।

हम जानते हैं कि मंत्री लंबे समय से घृणास्पद नारे लगा रहे हैं और यहां तक ​​कि कई बकवास ट्वीट भी किए हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि वे इस पैमाने पर सांप्रदायिक दंगों में अनुवाद करें। इसलिए शायद हम उसे एक ट्वीट और एक नारे के आधार पर इतने बड़े पैमाने पर हिंसा पैदा करने का श्रेय दे रहे हैं।

तब क्यों जब ट्रम्प भारत में थे?

सत्तारूढ़ दल का समर्थन करने वाले लोग, जो सीएए का समर्थन दिखाना चाहते थे, निश्चित रूप से ट्रम्प के प्रस्थान का इंतजार कर रहे थे क्योंकि पीएम मोदी भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि के बारे में बहुत सावधान हैं।

और यहां तक ​​कि मिश्रा और इसी तरह की मानसिकता के अन्य राजनेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे कोई भी कार्रवाई करने से पहले ट्रम्प की प्रतीक्षा कर रहे थे। तो जब वह यहां थे तब यह सब शुरू करने का क्या कारण होगा?

यह मानना ​​काफी चौंकाने वाला है कि भीड़ के इस पक्ष को ट्रम्प के जाने से पहले किसी भी हिंसा को शुरू करने के लिए कहा गया था क्योंकि इससे मोदी की ख़राब छवि उनके सामने आ जाएगी।

लेकिन मुझे आश्चर्य होता है कि वास्तव में कौन इन दंगों के पीछे था, क्योंकि पिछले कुछ समय से उनके विरोधी असंतोष में सीएए के विरोधी बहुत ही सभ्य और शांतिपूर्ण रहे हैं। वास्तव में, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकारों ने शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शनों का दौरा किया था और उन्हें किसी भी हिंसा या भ्रामक कार्य से पूरी तरह से रहित घोषित किया था।

तो अब यह सब क्यों हो रहा है?


Image Credits: Google Images

Sources: FirstpostIndian ExpressNY Times

Written Originally in English @chirali_08

Translated in Hindi by @innocentlysane


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